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राशि मिलान

वृषभ और वृषभ राशि मिलान

राशि गिनती
1
राशि स्वामी
शुक्र · शुक्र
तत्व
पृथ्वी · पृथ्वी

पूरा गुण मिलान कराएँ

समग्र चित्र

इन राशियों के नक्षत्र

वृषभ में कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा हैं; वृषभ में कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा हैं। नीचे की तालिका दोनों राशियों के बीच सबसे अधिक मिलने वाली नक्षत्र जोड़ियाँ दिखाती है।

वृषभ और वृषभ के तत्व

दो पृथ्वी राशियाँ सुरक्षा, घर और टिकाऊ चीज़ों से प्रेम बाँटती हैं। वृषभ और वृषभ धन, पारिवारिक कर्तव्य और दिनचर्या पर प्रायः सहमत रहते हैं और धीरे पर पक्का बनाते हैं। सलाह है कि जीवन में आनंद और नयापन भी रहे।

वृषभ से वृषभ तक की गिनती: भकूट

वृषभ और वृषभ एक ही राशि में हैं, दोनों ओर से गिनती एक। परंपरा इसे समान स्वभाव और एक जैसा चंद्रमा मानती है, जिससे समझ सहज रहती है। ऐसे में परिवार नक्षत्र और नाड़ी विशेष ध्यान से देखते हैं।

चर, स्थिर और द्विस्वभाव का मेल

दोनों स्थिर राशियाँ हैं, इसलिए निष्ठा गहरी है और बदलाव धीरे आता है। परंपरा छोटी बातों में लचीलेपन की सलाह देती है, ताकि ज़िद कभी बंधन की परीक्षा न ले।

राशि मिलान से क्या पता चलता है

अष्टकूट के आठ अंगों में वर्ण, वश्य, ग्रह मैत्री और भकूट चंद्र राशि से देखे जाते हैं; तारा, योनि, गण और नाड़ी जन्म नक्षत्र से। इसलिए राशि मिलान पूरे गुण मिलान की पहली परत है। पूरी तस्वीर के लिए नाड़ी, मांगलिक दोष और दोनों कुंडलियों का सातवाँ भाव भी देखा जाता है।

इस पन्ने को कैसे पढ़ें

पहले कूट तालिका देखें, फिर नक्षत्र जोड़ियाँ: एक ही राशि जोड़ी वाले दो लोगों का परिणाम उनके नक्षत्रों के अनुसार बहुत अलग हो सकता है। किसी नक्षत्र जोड़ी को खोलकर सभी कूट और अष्टकूट गुण देखें, या दोनों का जन्म विवरण भरकर पूरा मिलान कराएँ।

वृषभ और वृषभ के राशि आधारित अंग
कूटपरिणामअर्थ
भकूट (राशि कूट)मिलता हैवृषभ से वृषभ तक 1 की गिनती स्वीकार्य भकूट है।
वश्य (आकर्षण)समकोई राशि दूसरी की वश्य नहीं; आकर्षण अन्य अंगों से देखा जाता है।
ग्रह मैत्रीमिलता हैदोनों राशियों के स्वामी एक ही हैं, शुक्र, जो एक जैसी सोच को बल देता है।
तत्वमिलता हैदोनों पृथ्वी तत्व की राशियाँ हैं और स्वभाव बाँटती हैं।
वृषभ और वृषभ के बीच सबसे अच्छी नक्षत्र जोड़ियाँ
नक्षत्र जोड़ीनक्षत्र कूटअष्टकूट गुण (नक्षत्र आधारित)
रोहिणी + कृत्तिका4/79/21
मृगशिरा + कृत्तिका4/79/21
मृगशिरा + रोहिणी4/79/21
कृत्तिका + रोहिणी3/79/21
रोहिणी + मृगशिरा3/79/21
कृत्तिका + कृत्तिका3/76/21

सामान्य प्रश्न

क्या वृषभ और वृषभ की जोड़ी अच्छी है?

वधू की राशि से गिनने पर वृषभ से वृषभ तक 1 आता है। तालिका बताती है कि भकूट, वश्य और राशि स्वामी मिलते हैं या नहीं; अंतिम गुण अधिकतर नक्षत्रों से तय होते हैं।

वृषभ और वृषभ के स्वामी कौन हैं?

वृषभ के स्वामी शुक्र और वृषभ के स्वामी शुक्र हैं। मित्र या एक ही स्वामी आपसी समझ बढ़ाते हैं; शत्रु स्वामी अधिक धैर्य माँगते हैं।

भकूट दोष क्या है?

वधू की राशि से वर की राशि तक गिनती 6 और 8 (षडाष्टक), 2 और 12 (द्विद्वादश) या 5 और 9 (नवपंचम) आए तो उत्तर भारत में भकूट दोष माना जाता है। राशि स्वामी एक हों या मित्र हों तो शास्त्र इसका परिहार बताता है।

क्या वृषभ के साथ वृषभ और वृषभ के साथ वृषभ अलग हैं?

हाँ। पारंपरिक मिलान वधू की राशि से वर की राशि तक गिनता है, इसलिए उलटी जोड़ी का फल अलग हो सकता है। पन्ने के नीचे उलटी जोड़ी का लिंक है।

भकूट न मिले तो क्या करें?

नाड़ी, गण और तारा जैसे नक्षत्र आधारित अंग मज़बूत हों और राशि स्वामी मित्र हों, तो बहुत से पंडित जी रिश्ता स्वीकार कर लेते हैं। एक अंग अकेले निर्णय नहीं करता।

वृषभ और वृषभ के तत्व कौन से हैं?

वृषभ पृथ्वी तत्व की और वृषभ पृथ्वी तत्व की राशि है। समान तत्व स्वभाव बाँटते हैं; पूरक तत्व एक दूसरे को संतुलित कर सकते हैं।

क्या इतने से विवाह तय हो सकता है?

नहीं, यह परिचय है। पूरा मिलान दोनों की सटीक कुंडली, सभी अष्टकूट अंग, मांगलिक दोष और दशाओं का समय देखता है।

पूरा कुंडली मिलान कैसे कराएँ?

दोनों का जन्म विवरण गुण मिलान साधन में भरें। परिणाम में हर कूट अपने अर्थ के साथ दिखेगा।

क्या वृषभ और वृषभ के तत्व एक दूसरे के अनुकूल हैं?

वृषभ पृथ्वी और वृषभ पृथ्वी तत्व की है। ऊपर का तत्व वाला भाग बताता है कि परंपरा इस मेल को कैसे देखती है और क्या इसे मज़बूत करता है।

वृषभ और वृषभ में भकूट गिनती क्या है?

वृषभ से वृषभ तक गिनने पर 1 आता है। भकूट दोनों ओर से राशि की दूरी देखता है; ऊपर का भाग इस गिनती का पारंपरिक अर्थ बताता है।

वृषभ और वृषभ में कौन सी नक्षत्र जोड़ियाँ सबसे अच्छी हैं?

इस पन्ने की नक्षत्र तालिका दोनों राशियों के बीच सबसे अधिक कूट मिलने वाली जोड़ियाँ दिखाती है। हर जोड़ी का अपना विस्तृत पन्ना है।

वृषभ और वृषभ का दांपत्य मज़बूत कैसे करें?

परंपरा कहती है कि त्योहार और पारिवारिक संस्कार साथ मनाएँ, और दोनों राशियों के स्वामी शुक्र और शुक्र का उनके वार को स्मरण करें। प्रेम भरी बातचीत किसी भी कूट से अधिक काम करती है।