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राशि मिलान

कर्क और कर्क राशि मिलान

राशि गिनती
1
राशि स्वामी
चन्द्र · चन्द्र
तत्व
जल · जल

पूरा गुण मिलान कराएँ

समग्र चित्र

इन राशियों के नक्षत्र

कर्क में पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा हैं; कर्क में पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा हैं। नीचे की तालिका दोनों राशियों के बीच सबसे अधिक मिलने वाली नक्षत्र जोड़ियाँ दिखाती है।

कर्क और कर्क के तत्व

दो जल राशियाँ गहराई, समर्पण और अंतर्ज्ञान बाँटती हैं। कर्क और कर्क अक्सर बिना ज़्यादा कहे एक दूसरे को समझ लेते हैं, और पारिवारिक बंधन गहरे रहते हैं। जल को चंद्रमा से जोड़ने वाली परंपरा मन की लहरों को साथ सँभालने की सलाह देती है।

कर्क से कर्क तक की गिनती: भकूट

कर्क और कर्क एक ही राशि में हैं, दोनों ओर से गिनती एक। परंपरा इसे समान स्वभाव और एक जैसा चंद्रमा मानती है, जिससे समझ सहज रहती है। ऐसे में परिवार नक्षत्र और नाड़ी विशेष ध्यान से देखते हैं।

चर, स्थिर और द्विस्वभाव का मेल

दोनों चर राशियाँ हैं, इसलिए जोड़ी को बदलाव और नई शुरुआत भाती है। योजनाएँ जल्दी बनती हैं; एक दूसरे के अगले विचार के प्रति धैर्य ही इसकी साधना है।

राशि मिलान से क्या पता चलता है

अष्टकूट के आठ अंगों में वर्ण, वश्य, ग्रह मैत्री और भकूट चंद्र राशि से देखे जाते हैं; तारा, योनि, गण और नाड़ी जन्म नक्षत्र से। इसलिए राशि मिलान पूरे गुण मिलान की पहली परत है। पूरी तस्वीर के लिए नाड़ी, मांगलिक दोष और दोनों कुंडलियों का सातवाँ भाव भी देखा जाता है।

इस पन्ने को कैसे पढ़ें

पहले कूट तालिका देखें, फिर नक्षत्र जोड़ियाँ: एक ही राशि जोड़ी वाले दो लोगों का परिणाम उनके नक्षत्रों के अनुसार बहुत अलग हो सकता है। किसी नक्षत्र जोड़ी को खोलकर सभी कूट और अष्टकूट गुण देखें, या दोनों का जन्म विवरण भरकर पूरा मिलान कराएँ।

कर्क और कर्क के राशि आधारित अंग
कूटपरिणामअर्थ
भकूट (राशि कूट)मिलता हैकर्क से कर्क तक 1 की गिनती स्वीकार्य भकूट है।
वश्य (आकर्षण)समकोई राशि दूसरी की वश्य नहीं; आकर्षण अन्य अंगों से देखा जाता है।
ग्रह मैत्रीमिलता हैदोनों राशियों के स्वामी एक ही हैं, चन्द्र, जो एक जैसी सोच को बल देता है।
तत्वमिलता हैदोनों जल तत्व की राशियाँ हैं और स्वभाव बाँटती हैं।
कर्क और कर्क के बीच सबसे अच्छी नक्षत्र जोड़ियाँ
नक्षत्र जोड़ीनक्षत्र कूटअष्टकूट गुण (नक्षत्र आधारित)
पुष्य + पुनर्वसु4/79/21
आश्लेषा + पुनर्वसु4/79/21
आश्लेषा + पुष्य4/79/21
पुनर्वसु + पुष्य3/79/21
पुष्य + आश्लेषा3/79/21
पुनर्वसु + पुनर्वसु3/76/21

सामान्य प्रश्न

क्या कर्क और कर्क की जोड़ी अच्छी है?

वधू की राशि से गिनने पर कर्क से कर्क तक 1 आता है। तालिका बताती है कि भकूट, वश्य और राशि स्वामी मिलते हैं या नहीं; अंतिम गुण अधिकतर नक्षत्रों से तय होते हैं।

कर्क और कर्क के स्वामी कौन हैं?

कर्क के स्वामी चन्द्र और कर्क के स्वामी चन्द्र हैं। मित्र या एक ही स्वामी आपसी समझ बढ़ाते हैं; शत्रु स्वामी अधिक धैर्य माँगते हैं।

भकूट दोष क्या है?

वधू की राशि से वर की राशि तक गिनती 6 और 8 (षडाष्टक), 2 और 12 (द्विद्वादश) या 5 और 9 (नवपंचम) आए तो उत्तर भारत में भकूट दोष माना जाता है। राशि स्वामी एक हों या मित्र हों तो शास्त्र इसका परिहार बताता है।

क्या कर्क के साथ कर्क और कर्क के साथ कर्क अलग हैं?

हाँ। पारंपरिक मिलान वधू की राशि से वर की राशि तक गिनता है, इसलिए उलटी जोड़ी का फल अलग हो सकता है। पन्ने के नीचे उलटी जोड़ी का लिंक है।

भकूट न मिले तो क्या करें?

नाड़ी, गण और तारा जैसे नक्षत्र आधारित अंग मज़बूत हों और राशि स्वामी मित्र हों, तो बहुत से पंडित जी रिश्ता स्वीकार कर लेते हैं। एक अंग अकेले निर्णय नहीं करता।

कर्क और कर्क के तत्व कौन से हैं?

कर्क जल तत्व की और कर्क जल तत्व की राशि है। समान तत्व स्वभाव बाँटते हैं; पूरक तत्व एक दूसरे को संतुलित कर सकते हैं।

क्या इतने से विवाह तय हो सकता है?

नहीं, यह परिचय है। पूरा मिलान दोनों की सटीक कुंडली, सभी अष्टकूट अंग, मांगलिक दोष और दशाओं का समय देखता है।

पूरा कुंडली मिलान कैसे कराएँ?

दोनों का जन्म विवरण गुण मिलान साधन में भरें। परिणाम में हर कूट अपने अर्थ के साथ दिखेगा।

क्या कर्क और कर्क के तत्व एक दूसरे के अनुकूल हैं?

कर्क जल और कर्क जल तत्व की है। ऊपर का तत्व वाला भाग बताता है कि परंपरा इस मेल को कैसे देखती है और क्या इसे मज़बूत करता है।

कर्क और कर्क में भकूट गिनती क्या है?

कर्क से कर्क तक गिनने पर 1 आता है। भकूट दोनों ओर से राशि की दूरी देखता है; ऊपर का भाग इस गिनती का पारंपरिक अर्थ बताता है।

कर्क और कर्क में कौन सी नक्षत्र जोड़ियाँ सबसे अच्छी हैं?

इस पन्ने की नक्षत्र तालिका दोनों राशियों के बीच सबसे अधिक कूट मिलने वाली जोड़ियाँ दिखाती है। हर जोड़ी का अपना विस्तृत पन्ना है।

कर्क और कर्क का दांपत्य मज़बूत कैसे करें?

परंपरा कहती है कि त्योहार और पारिवारिक संस्कार साथ मनाएँ, और दोनों राशियों के स्वामी चन्द्र और चन्द्र का उनके वार को स्मरण करें। प्रेम भरी बातचीत किसी भी कूट से अधिक काम करती है।