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पृष्ठ खोलेंशास्त्रीय फलादेश
शास्त्रीय फलादेश आपकी जन्म कुंडली को उसी तरह पढ़ता है जैसे प्राचीन ग्रंथ पढ़ते हैं: भाव दर भाव, ग्रह दर ग्रह, आपकी कुंडली के योगों और दशा काल के समय के साथ। यह पारंपरिक जन्मपत्री फलादेश की तरह सरल भाषा में सजा है, और आप इसे छापकर रख सकते हैं।
यह जन्म विवरण, जन्म दिन के पंचांग, नक्षत्र और चरण, तथा लग्न और नवांश कुंडली से शुरू होता है। फिर लग्न और लग्नेश, बारहों भाव, राशि व भाव में नवग्रह, और हर ग्रह का बल पढ़ता है। योगों का अध्याय आपकी कुंडली में मौजूद गजकेसरी, राजयोग या धनयोग जैसे योग गिनाकर हर एक को समझाता है।
दूसरा भाग जन्म से वृद्धावस्था तक विंशोत्तरी दशा के साथ चलता है। हर महादशा उसकी अंतर्दशाओं सहित बताई जाती है, और आने वाले वर्ष शनि और बृहस्पति के गोचर जोड़कर विस्तार से पढ़े जाते हैं।
भाव और योगों के लिए बृहत् पराशर होरा शास्त्र, ग्रह फल के लिए फलदीपिका और सारावली, तथा दशा फल के लिए जातक पारिजात का अनुसरण किया गया है। फलादेश बताता है कि हर कथन किस सिद्धांत पर टिका है, ताकि आप तर्क समझ सकें।
अंतिम अध्याय उपाय तभी सुझाता है जब कुंडली में स्पष्ट आवश्यकता दिखे: पहले प्रार्थना, दान और व्रत, फिर मंदिर में पूजा। रत्नों का उल्लेख केवल इस सलाह के साथ होता है कि पहले किसी जानकार से परामर्श लें।
फलादेश यहाँ उपलब्ध सभी भाषाओं में मिलता है, हर भाषा और उसकी परंपरा के अनुसार लिखा हुआ। इसे यहीं पढ़िए या छापने योग्य प्रति उतार लीजिए।
यह उन सबके लिए है जो रखने योग्य पूरा लिखित फलादेश चाहते हैं: काम शुरू करते युवा, विवाह की बातचीत की तैयारी करते परिवार, और नई महादशा में प्रवेश करते लोग जो आने वाले वर्षों को समझना चाहते हैं। बहुत से परिवार हर सदस्य के लिए एक रखते हैं और नई दशा या बड़े गोचर पर उसे फिर पलटते हैं। तर्क दिखाया गया है, इसलिए यह उन विद्यार्थियों के भी काम का है जो देखना चाहते हैं कि शास्त्रीय नियम असली कुंडली पर कैसे लागू होते हैं।
पहले सार पढ़िए, फिर लग्नेश और चालू दशा वाले अध्याय। कालक्रम में अगले दो वर्षों की तिथियाँ चिह्नित कीजिए। किसी भाग पर प्रश्न उठे तो उसी कुंडली के साथ ज्योतिषी से परामर्श कर सकते हैं।
उत्तर भारत के घरों में जन्मपत्री बाँचना एक संस्कार रहा है: विवाह की बात चलने पर या किसी बड़े निर्णय से पहले कुल पुरोहित लिपटी हुई पत्री खोलते, पराशर के श्लोक सुनाते और भाव दर भाव फल बताते, और घर के बड़े ध्यान से सुनते। वही पूरा, कारण सहित बाँचना यह फलादेश लिखित रूप में देता है।
कुंडली के अनुसार आम तौर पर चालीस से सत्तर पृष्ठ।
हाँ। भाव और वर्ग कुंडलियाँ उसी पर निर्भर हैं।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र, फलदीपिका, सारावली और जातक पारिजात।
यह आपकी कुंडली के लिए शास्त्रीय नियमों से रचा गया है; चर्चा के लिए ज्योतिषी परामर्श जोड़ सकते हैं।
हाँ। बनाने से पहले भाषा चुनिए, फलादेश हिंदी में ही आएगा।
हाँ। सातवाँ भाव, शुक्र और नवांश विस्तार से पढ़े जाते हैं।
हाँ। हर योग का नाम, कुंडली में स्थान और अर्थ दिया जाता है।
हाँ। छापने योग्य प्रति उतारी जा सकती है।
पूरे दशा चक्र तक, अगले पाँच वर्ष विस्तार से।
हाँ। मँगाने से पहले एक नमूना अध्याय दिखाया जाता है।
हाँ। उनका जन्म विवरण भरिए।
बता दीजिए; फलादेश सूचित करेगा कि कौन से भाग सटीक समय पर निर्भर हैं।