इस वर्ष के हिंदू त्योहारों की तिथियाँ, आपके शहर के अनुसार
हमारे त्योहार चांद्र और सौर पंचांग पर चलते हैं, इसलिए उनकी तारीख हर साल बदलती है और शहर से शहर में एक दिन का अंतर भी आ सकता है। यहाँ प्रमुख त्योहार और मासिक व्रत तारीख, उन्हें तय करने वाली तिथि या नक्षत्र और पूजा के लिए ज़रूरी समय के साथ आपके स्थान के लिए गणना करके दिए गए हैं।
त्योहार की तिथि कैसे तय होती है
अधिकतर त्योहार किसी चांद्र मास की खास तिथि से बँधे हैं: गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी, दीपावली कार्तिक अमावस्या, राम नवमी चैत्र शुक्ल नवमी, जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की आधी रात। उत्तर भारत की पूर्णिमांत परंपरा में महीना पूर्णिमा पर पूरा होता है, इसलिए जो जन्माष्टमी यहाँ भाद्रपद में है, वही अमांत पंचांग में श्रावण कृष्ण अष्टमी कहलाती है; दिन वही रहता है, केवल महीने का नाम बदलता है। मकर संक्रांति सूर्य के राशि बदलने से तय होती है।
पंचांगों में अंतर क्यों
एक तिथि किसी दिन दोपहर में शुरू होकर अगले दिन खत्म हो सकती है। हर त्योहार का नियम है कि कौन सा दिन माना जाए: सूर्योदय के समय की तिथि, मध्याह्न की तिथि या निशीथ काल की तिथि। शहरों में सूर्योदय अलग होने से दो जगहें एक ही त्योहार अलग दिन मना सकती हैं। स्मार्त और वैष्णव नियमों के अंतर से एकादशी और जन्माष्टमी में भी कभी कभी दो तारीखें दिखती हैं।
मासिक व्रत
बड़े त्योहारों के अलावा बहुत से परिवार नियमित व्रत रखते हैं: महीने में दो बार एकादशी, त्रयोदशी की संध्या में प्रदोष, पूर्णिमा के बाद संकष्टी चतुर्थी, मासिक शिवरात्रि, पितरों के तर्पण की अमावस्या, सत्यनारायण कथा की पूर्णिमा, और करवा चौथ जैसे वार्षिक व्रत। आपके शहर के सही समय के साथ ये सूची में आते हैं।
क्षेत्रीय त्योहार
एक ही खगोलीय घटना को भारत कई नामों से मनाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर उत्तर भारत में नव संवत्सर और चैत्र नवरात्रि, महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, दक्षिण में उगादि। सौर नववर्ष पर पंजाब में बैसाखी, बंगाल में पोइला बोइशाख, तमिलनाडु में पुथांडु, केरल में विषु। मकर संक्रांति के आसपास लोहड़ी, खिचड़ी, उत्तरायण, पोंगल और बिहू। बिहार और पूर्वांचल में छठ कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य को अर्घ्य देकर मनाया जाता है।
सूची का उपयोग
सही तारीख और समय के लिए अपना शहर चुनें। किसी त्योहार को छुएँ तो उसकी कथा, सामान्य विधि और पूजा का शुभ मुहूर्त दिखेगा। त्योहार को अपने तिथिपत्र में जोड़ें, एक दिन पहले याद दिलाया जाएगा।
प्रकाश, चंद्रमा और ऋतुएँ
परंपरा मानती है कि हमारे त्योहार आकाश की लय से बुने हुए हैं। दीपावली की अमावस्या में दीये जलाना अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव है; छठ में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य जल और प्रकाश के मिलन की उपासना है। जैसे चंद्रमा के बढ़ने घटने से समुद्र में ज्वार उठता है, वैसे ही मन और प्राण भी लहराते हैं, ऐसा ऋषियों ने कहा; इसीलिए एकादशी का उपवास और पूर्णिमा का स्नान। सूर्य सिद्धांत की गणना से बँधे ये दिन हर ऋतु को साधना में बदल देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दीपावली हर साल अलग तारीख पर क्यों आती है?+
दीपावली चांद्र मास पर चलती है। चांद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटा है, इसलिए अंग्रेज़ी तारीख खिसकती है।
दो तिथिपत्र अलग तारीख क्यों दिखाते हैं?+
वे अलग शहर, अलग सूर्योदय नियम या अलग मास पद्धति अपना सकते हैं।
क्या तारीखें मेरे शहर की हैं?+
हाँ, शहर चुनने के बाद। वरना एक पूर्व निर्धारित स्थान लिया जाता है।
अमांत और पूर्णिमांत में क्या अंतर है?+
अमांत महीना अमावस्या पर खत्म होता है, दक्षिण और पश्चिम भारत में प्रचलित। पूर्णिमांत महीना पूर्णिमा पर खत्म होता है, उत्तर भारत में प्रचलित; इसी कारण कृष्ण पक्ष के महीने का नाम दोनों में अलग होता है।
एकादशी कब है?+
हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि। व्रत के लिए सूर्योदय की तिथि मानी जाती है।
क्या मकर संक्रांति हमेशा 14 या 15 जनवरी को होती है?+
हाँ, यह सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से तय होती है, जो 14 या 15 जनवरी को पड़ता है।
ओणम कैसे तय होता है?+
मलयालम महीने चिंगम में तिरुवोणम नक्षत्र के दिन।
क्या याद दिलाया जा सकता है?+
हाँ। त्योहार को अपने तिथिपत्र में जोड़ें।
क्या मुहूर्त भी दिए हैं?+
हाँ। प्रमुख त्योहारों पर पूजा का शुभ समय दिखाया जाता है।
क्या जैन, सिख और बौद्ध पर्व भी हैं?+
महावीर जयंती, गुरु नानक जयंती और बुद्ध पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्व शामिल हैं।
प्रदोष क्या है?+
त्रयोदशी तिथि में सूर्यास्त के आसपास का समय, भगवान शिव को समर्पित।
संकष्टी चतुर्थी क्या है?+
पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी, गणेश जी के लिए व्रत जो चंद्रोदय पर खोला जाता है।