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ज्योतिष परामर्श

अपनी कुंडली पर ज्योतिषी से बात कीजिए

परामर्श आपकी अपनी कुंडली पर एक बातचीत है। एक स्पष्ट उत्तर, स्वचालित संवाद, या अनुभवी ज्योतिषी के साथ पूरी बैठक चुनिए। हर विकल्प आपके सहेजे जन्म विवरण लेता है, इसलिए आप विवरण से नहीं, अपने प्रश्न से शुरू कर सकते हैं।

पूछने के तीन तरीके

जब एक स्पष्ट उत्तर चाहिए, जैसे क्या इस वर्ष नौकरी बदलना अनुकूल है, तब एक प्रश्न पूछिए। आगे पूछते हुए विषय टटोलना हो तो स्वचालित संवाद चुनिए। जब विषय महत्वपूर्ण हो, जैसे विवाह मिलान, संपत्ति का निर्णय या लंबा दशा परिवर्तन, और आप चाहें कि ज्योतिषी आपके साथ पूरी कुंडली देखे, तब बैठक तय कीजिए।

प्रश्न तैयार करना

अच्छा प्रश्न स्पष्ट और व्यावहारिक होता है। जीवन सुधरेगा या नहीं पूछने के बजाय पूछिए कि आपकी दशा के अगले दो वर्ष काम के लिए क्या कहते हैं, या कोई विशेष महीना विवाह के लिए शुभ है या नहीं। जन्म समय तैयार रखिए, और मिलान के लिए दोनों के विवरण।

ज्योतिषी क्या देखते हैं

ज्योतिषी आपकी जन्म कुंडली और नवांश, चल रही महादशा और अंतर्दशा, शनि, बृहस्पति, राहु और केतु के मुख्य गोचर, और आपके प्रश्न से जुड़े योग देखते हैं। समय तय करने के लिए वे आपके नगर का पंचांग और मुहूर्त नियम देखते हैं।

भाषाएँ

परामर्श अनेक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। बैठक तय करते समय अपनी भाषा चुनिए; ज्योतिषी उसी भाषा में आपसे बात करेंगे।

निजता

आपके जन्म विवरण और बातचीत निजी हैं। आप उन्हें अपने खाते से कभी भी मिटा सकते हैं।

परामर्श के बाद

मुख्य बातें, बताई गई तारीखें और उपाय सहित एक छोटा लिखित सार आपके खाते में सहेजा जाता है, जिसे आप फिर पढ़ सकते हैं।

लोग अक्सर क्या पूछते हैं

परिवार सबसे अधिक विवाह मिलान और विवाह का समय, नौकरी बदलना और व्यापार आरंभ, संपत्ति खरीदना और गृह प्रवेश, बच्चों की पढ़ाई, और शनि या राहु की महादशा जैसे लंबे दशा परिवर्तन लेकर आते हैं। कुछ लोग कठिन वर्ष के बाद आते हैं, यह समझने कि उसका अर्थ क्या था और अगला काल क्या लाएगा। प्रश्न जो भी हो, ज्योतिषी आपकी कुंडली और चल रही दशाओं से शुरू करते हैं और हर निष्कर्ष ऐसे समझाते हैं कि आप उसे समझ सकें।

ज्योतिषी चुनना

हर ज्योतिषी के परिचय में उनकी भाषाएँ, उनकी परंपराएँ जैसे पाराशरी, कृष्णमूर्ति पद्धति या नाड़ी, और वे विषय दिखते हैं जिन पर वे सबसे अधिक काम करते हैं। पहले के जातकों की राय हर परिचय के पास दिखती है।

कुल पुरोहित और तीर्थ के पंडा

उत्तर भारत में हर परिवार के कुल पुरोहित होते आए हैं, जो मुंडन से विवाह तक कुंडली देखते हैं। हरिद्वार और गया के पंडा अपनी बहियों में पीढ़ियों की वंशावली सँभालते हैं, और कोई भी परिवार जाकर अपने परदादा का नाम उनकी लिखावट में देख सकता है। उसी भरोसे और निरंतरता का संबंध यह परामर्श देना चाहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकल्पों में से कैसे चुनें?

एक उत्तर के लिए एक प्रश्न, टटोलने के लिए बातचीत, महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए बैठक।

क्या जन्म समय चाहिए?

हाँ, भावों और दशा के सटीक पाठ के लिए।

क्या हिंदी में परामर्श ले सकते हैं?

हाँ। बैठक तय करते समय हिंदी चुनिए।

बैठक कितनी लंबी होती है?

अलग अलग अवधियाँ हैं, जो तय करते समय दिखती हैं।

क्या विवाह मिलान पूछ सकते हैं?

हाँ। दोनों के जन्म विवरण साथ लाइए।

क्या लिखित सार मिलेगा?

हाँ, आपके खाते में सहेजा जाएगा।

क्या मेरी बातचीत निजी है?

हाँ। आप उसे कभी भी मिटा सकते हैं।

क्या किसी और के बारे में पूछ सकते हैं?

हाँ, उनके जन्म विवरण और अनुमति के साथ।

जन्म समय न पता हो तो?

बता दीजिए; ज्योतिषी अन्य विधियाँ अपना सकते हैं या समय शुद्ध कर सकते हैं।

क्या दोबारा बैठक तय कर सकते हैं?

हाँ, उन्हीं ज्योतिषी के साथ।

कौन से प्रश्न सबसे अच्छे रहते हैं?

किसी काल या निर्णय पर स्पष्ट, व्यावहारिक प्रश्न।

क्या उपाय बताए जाते हैं?

केवल वहाँ, जहाँ आपकी कुंडली स्पष्ट आवश्यकता दिखाए।

क्या पुरानी जन्मपत्री जैसे कागज़ दिखा सकते हैं?

हाँ। पुरानी जन्मपत्री का चित्र भेजिए, ज्योतिषी उसे यहाँ बनी कुंडली से मिलाएँगे।

क्या मिलान बैठक में दोनों परिवार जुड़ सकते हैं?

हाँ। दोनों कुंडलियाँ सामने रखकर दोनों पक्ष साथ बैठ सकते हैं।

ज्योतिषी किन परंपराओं को मानते हैं?

पाराशरी सबसे सामान्य है; कृष्णमूर्ति पद्धति और नाड़ी के जानकार भी हैं। हर परिचय यह बताता है।