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Festivals, vratas and the panchang for every day, with your own todos and reminders.
Thursday, 15 October 2026
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तिथिपत्र
तिथिपत्र हर महीने को तिथि, नक्षत्र, त्योहार और शुभ दिनों के साथ, आपके शहर के लिए गणना करके दिखाता है। अंग्रेज़ी महीने और पूर्णिमांत चांद्र मास के बीच बदलें, किसी भी दिन को छूकर पूरा पंचांग खोलें, और अपने परिवार के व्रतों के लिए याद दिलाने की सूचना जोड़ें।
भारतीय पंचांग महीनों को दो तरह गिनते हैं। तमिल, मलयालम, ओड़िया और बांग्ला पंचांग सौर मास मानते हैं, जो सूर्य के नई राशि में जाने पर शुरू होते हैं। उत्तर भारत, तेलुगु, कन्नड़ और मराठी पंचांग चांद्र मास मानते हैं, जिनके नाम पूर्णिमा के समय के नक्षत्र पर रखे गए हैं: चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, कार्तिक। उत्तर भारत में महीना पूर्णिमा पर पूरा होता है, यानी पूर्णिमांत पद्धति, जबकि दक्षिण और पश्चिम में अमावस्या पर।
हर तारीख पर सूर्योदय की तिथि और नक्षत्र, पक्ष, वार का स्वामी, और कोई त्योहार या व्रत। एकादशी, प्रदोष, अमावस्या, पूर्णिमा, संकष्टी चतुर्थी और मासिक शिवरात्रि जैसे खास दिन अलग से चमकते हैं। दिन खोलें तो राहु काल, यमगंड और गुलिक के साथ पूरा पंचांग, साथ में अभिजीत मुहूर्त और चौघड़िया।
सामान्य मुहूर्त नियमों के अनुसार तिथिपत्र विवाह, गृह प्रवेश, विद्यारंभ और यात्रा के लिए उपयुक्त दिन चिह्नित कर सकता है। किसी बड़े काम के लिए संबंधित लोगों की कुंडली से मेल खाता समय चुनने को मुहूर्त खोज का उपयोग करें।
सूर्योदय, तिथि का बदलना और राहु काल सब स्थान पर निर्भर हैं, इसलिए तारीखें आपके चुने शहर के लिए निकाली जाती हैं। विदेश में बसे परिवार अपना वर्तमान शहर चुनकर भी भारतीय त्योहार नियम निभा सकते हैं।
उत्तर भारतीय, तमिल, केरल, तेलुगु, कन्नड़ या बांग्ला पद्धति चुनें, ताकि महीनों के नाम और त्योहार उसी रूप में दिखें जैसा आपका परिवार मानता है। तारीखें सामान्य रूप से दृक् पंचांग पद्धति से दिखाई जाती हैं।
किसी त्योहार या व्रत को याद दिलाने की सूची में जोड़ें, एक शाम पहले सूचना आएगी। किसी महीने को छाप सकते हैं या परिवार के साथ संदेश द्वारा साझा कर सकते हैं।
उत्तर भारत का नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है, और महीने चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन चलते हैं। पूर्णिमांत गणना में चैत्र का कृष्ण पक्ष होली के अगले दिन से ही शुरू हो जाता है। हर महीने के अपने पर्व हैं: चैत्र में नवरात्रि और राम नवमी, श्रावण में सावन के सोमवार और रक्षाबंधन, भाद्रपद में जन्माष्टमी, आश्विन में शारदीय नवरात्रि और दशहरा, कार्तिक में करवा चौथ, दीपावली और छठ, माघ में मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी, फाल्गुन में महाशिवरात्रि और होली। विक्रम संवत ईस्वी सन् से लगभग सत्तावन वर्ष आगे चलता है।
बारह चांद्र मास सौर वर्ष से लगभग ग्यारह दिन छोटे हैं, इसलिए लगभग हर बत्तीस महीने में एक अतिरिक्त चांद्र मास जुड़ता है, जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं। इसमें विवाह जैसे बड़े संस्कार आमतौर पर नहीं होते, पर जप, दान और कथा का विशेष महत्व है। त्योहार अगले सामान्य महीने में खिसक जाते हैं। तिथिपत्र इन महीनों को साफ़ चिह्नित करता है।
पूर्णिमांत परंपरा में महीना पूरे चंद्रमा के प्रकाश पर संपन्न होता है; ऋषियों ने पूर्णिमा को पूर्णता का क्षण माना। जैसे पूर्णिमा पर समुद्र में ज्वार चढ़ता है, वैसे ही मन और प्राण भी भर उठते हैं, यह मान्यता है; इसीलिए गंगा स्नान, कथा और दीपदान पूर्णिमा को होते हैं। सूर्य सिद्धांत और वेदांग ज्योतिष ने इसी लय को गणना में बाँधा, और गाँव की चौपाल में पंडित जी का पत्रा आज भी ऋतुओं का रास्ता बताता है।
अंग्रेज़ी तारीख के साथ चांद्र मास, पक्ष और तिथि दिखाई जाती है।
पूर्णिमा के अगले दिन, कृष्ण प्रतिपदा से। अमांत पद्धति में अमावस्या के अगले दिन से।
वे अलग शहर और अलग सूर्योदय नियम अपनाते हैं।
हाँ। कोई भी दिन खोलें, राहु काल, यमगंड और गुलिक दिखेंगे।
हाँ। केरल पद्धति चुनें तो कोल्लम संवत के महीने दिखेंगे।
हाँ। किसी भी महीने के लिए छापने का विकल्प है।
हाँ। एकादशी, प्रदोष, अमावस्या और पूर्णिमा हर महीने।
पंद्रह दिन की अवधि: शुक्ल पक्ष बढ़ते चंद्रमा का, कृष्ण पक्ष घटते चंद्रमा का।
हाँ। किसी भी व्रत को याद दिलाने की सूची में जोड़ें।
सामान्य शुभ दिन चिह्नित हैं। निजी तारीख के लिए मुहूर्त खोज।
हाँ। अपना शहर चुनें, सारे समय उसी के अनुसार होंगे।
वास्तविक ग्रह स्थितियों वाली दृक् पंचांग पद्धति।